14 सितंबर को हिंदी दिवस क्यों मनाया जाता है?
14 सितबंर का दिन हर भारतवासी के लिए गर्व का दिन है। ये पूरे देश को एक रखने वाली भाषा हिंदी का दिन है। सांस्कृतिक विविधताओं से भरे देश भारत में हिंदी दिवस के दिन की अहमियत बहुत ज्यादा है। भारत के विभिन्न क्षेत्रो में लोगों का खान-पान, रहन-सहन, वेश-भूषा, यहां तक की विचारधारा भी अलग-अलग प्रकार की है। भारत के विभिन्न भागों में अलग-अलग धर्म हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध, पारसी तथा जैन धर्म के अनुयायी रहते हैं। और ये धर्म विभिन्न जातियों में बंटे हैं। विभिन्न क्षेत्रों के लोग अलग अलग भाषाएं बोलते हैं। धर्म, जाति, भाषा, संस्कृति की इन विविधताओं के फासलों को हिंदी खत्म कर देती है। हिंदी ही है तो अलग अलग क्षेत्रों की लोगों के दिलों की दूरियों को मिटाती है और सभी को एकता के सूत्र में बांधे रखती है।
कोई भी हिन्दुस्तानी जहां भी हो, दूसरे हिंदुस्तानी से हिन्दी भाषा के जरिए ही अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करता है। अपनी दिल और मन की बात अगर किसी भाषा में सहजता से की जा सकती है तो वो हिंदी ही है। आज देश का शायद ही ऐसा कोई हिस्सा हो जहां हिंदी सहजता से बोली या समझी ना जाती हो। हिंदी केवल हमारी मातृभाषा या राष्ट्रभाषा ही नहीं यह राष्ट्रीय अस्मिता और गौरव का प्रतीक है।
इतिहास में 14 सितंबर 1949 ,भारत की संविधान सभा ने एक वोट से तय किया गया कि हिंदी भारत की अधिकारिक भाषा होगी। इस दिन को चिन्हित करने के लिए हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है । प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू थे जिन्होंने 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था ।
इंग्लिश और मंदारिन के बाद हिंदी विश्व की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। दुनिया की सबसे प्रसिद्ध ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी हर साल भारतीय शब्दों को जगह दे रही है।1949 से यह दिवस पूरे देश में स्कूलों, कॉलेजों ,अन्य शैक्षणिक संस्थानों, कार्यालयों और अन्य स्थानों पर हर साल मनाया जाता है यह दिन भारत में हिंदी भाषा के महत्व को दर्शाता है।
हिंदी भारत में अधिकारिक भाषा है और फिजी , न्यूजीलैंड, सिंगापुर ,मॉरीशस ,अन्य देशों में काफी लोकप्रिय हैं। दुनिया भर में 420 मिलियन से अधिक लोग हिंदी को अपनी पहली भाषा के रूप में बोलते हैं जबकि 12 करोड लोगों के पास हिंदी दूसरी भाषा है।
हिंदी का नाम फारसी शब्द ‘हिंद’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है सिंधु नदी की भूमि। फारसी बोलने वाले तुर्क जिन्होंने गंगा के मैदान और पंजाब पर आक्रमण किया, 11वीं शताब्दी की शुरुआत में सिंधु नदी के किनारे बोली जाने वाली भाषा को ‘हिंदी’ नाम दिया था। यह भाषा भारत की आधिकारिक भाषा है और संयुक्त अरब अमीरात में एक मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक भाषा है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हिन्दी को जनमानस की भाषा कहा था। वह चाहते थे कि हिन्दी राष्ट्रभाषा बने। उन्होंने 1918 में आयोजित हिन्दी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी को राष्ट्र भाषा बनाने के लिए कहा था। आजादी मिलने के बाद लंबे विचार-विमर्श के बाद आखिरकार 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में हिन्दी को राज भाषा बनाने का फैसला लिया गया।
