Khudiram Bose: वो एक रात, जब खुलता है मुजफ्फरपुर केंद्रीय कारा का बंद दरवाज़ा
15 August : स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता दिवस के महीने अगस्त से बिहार का बहुत गहरा नाता है। तभी तो, सूर्योदय से पहले 3 बजे मुजफ्फरपुर केंद्रीय कारा का दरवाजा खुला। यहीं अमर सेनानी खुदीराम बोस को महज 18 साल की उम्र में फांसी दी गई थी।
महज 18 वर्ष की उम्र में देश के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को गले लगाने वाले देश के सबसे कम उम्र के बलिदानी शहीद खुदीराम बोस का आज (सोमवार) 118वां शहादत दिवस मनाया जा रहा है।अहले सुबह 3 बजे मुजफ्फरपुर सेंट्रल जेल का गेट खुला और परिसर देशभक्ति की भावना से गूंज उठा। शहीद खुदीराम बोस की 118वीं पुण्यतिथि पर बिहार बंगाली एसोसिएशन, मुजफ्फरपुर शाखा के सदस्यों ने केंद्रीय कारा के ऐतिहासिक सेल और फांसी स्थल पर पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
1. झुमा दास
2. नीला बोस
3. पियाली चटर्जी
4. प्रोफेसर दुर्गा पद दास
5. शुभाशीष बोस
6. देवाशीष गुहा
7. मंगलमय लाहिड़ी
8. अमरनाथ चटर्जी
9. चन्दन राय
10. कुणाल चक्रवर्ती
11. नीलमणि सिन्हा
12. जीतेन्द्र कुमार

कार्यक्रम में तिरहुत प्रक्षेत्र के कमिश्नर, डीएम सुब्रत सेन, एसएसपी सुशील कुमार, ग्रामीण एसपी राजेश सिंह प्रभाकर, सिटी एसपी कोटा किरण कुमार, एएसपी टाउन सुरेश कुमार, मिठनपुरा थानाध्यक्ष समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान मेदिनापुर से आए लोग शहीद के गांव की माटी और काली मंदिर का प्रसाद लेकर पहुंचे। फांसी स्थल पर माटी में पौधे लगाए गए और प्रसाद अर्पित किया गया। ठीक सुबह 3:50 बजे उसी समय जब 11 अगस्त 1908 को खुदीराम को फांसी दी गई थी। उपस्थित लोगों और अधिकारियों ने उन्हें सलामी दी और पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद सभी उस ऐतिहासिक सेल में पहुंचे, जहां खुदीराम को रखा गया था।
1905 में लॉर्ड कर्जन ने जब बंगाल का विभाजन किया तो उसके विरोध में सड़कों पर उतरे अनेकों भारतीयों को उस समय के कलकत्ता के मॅजिस्ट्रेट किंग्जफोर्ड ने क्रूर दंड दिया गया था. वहीं, अन्य मामलों में भी उसने क्रान्तिकारियों को बहुत कष्ट दिया था. इसके परिणामस्वरूप किंग्जफोर्ड को पदोन्नति देकर मुजफ्फरपुर में सत्र न्यायाधीश के पद पर भेजा गया.
30 अप्रैल 1908 को शहीद खुदीराम बोस और प्रफुल चंद्र चाकी किंग्जफोर्ड के बंगले के बाहर घोड़ागाड़ी से उसके आने की राह देखने लगे. रात में साढ़े आठ बजे के आसपास क्लब से किंग्जफोर्ड की बग्घी के समान दिखने वाली गाड़ी आते हुए देखकर खुदीराम गाड़ी के पीछे भागने लगे. रास्ते में बहुत ही अंधेरा था. गाड़ी किंग्जफोर्ड के बंगले के सामने आते ही खुदीराम ने अंधेरे में ही आने वाली बग्घी पर निशाना लगाकर जोर से बम फेंका.


