Patna : शर्मनाक! स्कूल की दीवारों में कैद दो साल की चुप्पी, अब टूटी मासूम की आवाज़
Patna: लड़की… आख़िर कहाँ सुरक्षित है? ना कॉलेज में, ना स्कूल में, ना सड़कों पर, ना घर के बाहर… और अब तो उन संस्थानों में भी नहीं, जिन्हें हम सबसे ज़्यादा सुरक्षित मानते आए हैं.
बिहार की राजधानी पटना से आई एक खबर ने एक बार फिर इंसानियत को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
एक नेत्रहीन बालिका विद्यालय में पढ़ने वाली 12 साल की दृष्टिहीन बच्ची के साथ यौन शोषण का मामला सामने आया है। जिस मासूम की आंखों में दुनिया की पूरी रोशनी नहीं थी,उसके साथ ऐसा घिनौना खेल खेला गया जिसे इंसान नहीं, हैवान ही कर सकता है।
बच्ची ने आरोपी को उसकी आवाज़ से पहचान लिया।अब सोचिए जो बच्ची देख नहीं सकती, वो भी भेद समझ गई…तो हम अब तक क्यों आंखें मूंदे बैठे हैं?
सवाल सिर्फ उस एक बच्ची का नहीं है, सवाल पूरे समाज का है। राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का खेल फिर शुरू हो गया है— सत्ता पक्ष विपक्ष पर आरोप मढ़ रहा है, विपक्ष सरकार को घेर रहा है।टीवी डिबेट, प्रेस कॉन्फ्रेंस, बयानबाज़ी… और फिर सन्नाटा।
ना इंसाफ़ की कोई ठोस गारंटी, ना सुरक्षा की कोई पुख़्ता योजना। शायद सदी कोई भी हो, लेकिन दर्द वही है।बलात्कार, हत्या, अपहरण, शोषण — हर दौर में थे, आज भी हैं, और अफ़सोस… शायद कल भी रहेंगे।
आज अगर आप कोई भी अख़बार उठाएं या सोशल मीडिया पर नज़र डालें, तो लगभग 90 प्रतिशत खबरें हिंसा, बलात्कार, चोरी, डकैती और क्रूरता से भरी मिलेंगी।
क्या यही है हमारा समाज?
जहाँ अपराध आम हो गया है,और संवेदना सिर्फ़ ट्रेंडिंग हैशटैग में सिमट गई है?अब चुप रहना गुनाह है।अब सहना भी सह-अपराध है मोमबत्तियाँ जलती रहीं लेकिन उनकी रोशनी सोच तक नहीं पहुँची।
जब बच्चियों ने पूछा — अजीत सर जेल जाएंगे ना?
यह सवाल किसी मासूम जिज्ञासा का नहीं,बल्कि डर और असुरक्षा की एक गूंज थी।यह वही बच्चियां थीं, जो पटना के नेत्रहीन बालिका विद्यालय में रह रही थीं।जब पीड़िता के परिजन और पुलिस स्कूल पहुंचे, तो बाकी छात्राओं की मासूम लेकिन चौंकाने वाली प्रतिक्रिया ने सबकुछ साफ कर दिया।छात्राएं आरोपी क्लर्क अजीत कुमार से पहले से डरी हुई थीं।
मामला कितना गहरा है?
2018 से हॉस्टल में रह रही एक छात्रा ने गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल लौटने से इनकार कर दिया। 17 मई को स्कूल बंद हुआ था, और जब 25 जून को दोबारा खुला —तो वह छात्रा हॉस्टल वापस नहीं जाना चाहती थी परिजनों का कहना है कि बच्ची डरी हुई है, और जो कुछ उसने बताया, वो सिर्फ एक घटना नहीं—बल्कि एक गहरे और भयावह सच की झलक हो सकती है।
पीड़िता कौन है?
वो सिर्फ़ 12 साल की एक दृष्टिहीन बच्ची है, जिसकी आंखों की रोशनी सिर्फ़ 10%है। लेकिन उसने आरोपी को उसकी आवाज़ से पहचान लिया।परिजनों ने अगमकुआं थाने में FIR दर्ज करवाई,और पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन सवाल यह है —क्या ये मामला सिर्फ एक बच्ची तक सीमित है?या इसके पीछे कोई बड़ा और गहरा षड्यंत्र है?
अब वक्त है… आवाज़ उठाने का!
जिस स्कूल को मंदिर का दर्जा दिया जाता है,उस मंदिर में दरिंदगी के ये दृश्य कैसे पनप रहे हैं? क्या हमारी व्यवस्थाएं इतनी खोखली हो चुकी हैं
कि एक दृष्टिहीन बच्ची भी सुरक्षित नहीं रही? अब वक्त है सिर्फ सवाल करने का नहीं, बल्कि खुद से जवाब माँगने का भी है। क्योंकि अगली बार अख़बार की सुर्ख़ियों में नाम किसी और का नहीं,आपके अपने का भी हो सकता है।
अगर आप इस घटना से आहत हैं —
चुप मत रहिए। शेयर कीजिए, आवाज़ बनिए। क्योंकि बदलाव आपकी चुप्पी से नहीं, आपकी हिम्मत से आएगा।

